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धर्म और साइन्स । Religion and Science

अक्सर बहस छिड़ती है कि साइन्स से धर्म को सिद्ध करो। धर्म मानव की मनोवृत्ति है जिसका अध्धयन है। वैसा ही साइन्स की नई खोज को भी कह दिया जाता है कि हमारे धर्म में पहले से ही यह बात कह दी गई थी। धर्म का कार्य मानव को सभ्य बनाना है भाई-चारा सिखाना है न कि किसी साइन्स को सिद्ध करने की जवाबदारी है। धर्म में साइन्स की बात उतनी ही की है जितनी मानवता के लिए आवश्यक है। साइन्स इन्सान को दयालु नहीं बना सकता, ईमानदार नहीं बना सकता। जिन्होंने धर्म में साइन्स देखें हैं एवं उससे खेलना सीखा है, क्रूर हुएं है एवं हिंसक हुएं हैं एवं अपने स्वार्थ के पीछे अन्यायी हुएं हैं। धर्म त्याग सिखाता है, विश्वास सिखाता है, कर्तव्य एवं साधना का नाम है।   वापस               look.thats.im

आदि काल जंगल में । Aadi kal in the jungle

    look.thats.im   प्राचीन कालीन मानव बीहड़ो एवं जंगलो में रहता था। उसका रहन सहन भी वैसा था, जब एक तरह के दो टांग के दो हाथ वाले लोग आपस में मिलते तो इशारे एवं आवाज़ से एक दूसरे को समझाते एवं काम करते, इस तरह बोली का जन्म हुआ। जैसे जैसे युग बदला अजीव वस्तु, जीव एवं समय का विज्ञान समझने लगा एवं एक दूसरे पर विश्वास करने लगा अंततः टोली बना कर रहने लगा, फिर मानव जीवन मधुर बनाने हेतु संस्कार बनने लगे एवं धर्म का निर्माण हुआ। इस तरह बस्तियों का निर्माण फिर शहरों का निर्माण एवं देश का निर्माण हुआ। पृथ्वी की भौगोलिकता के कारण मनुष्य के रंग रूप एवं आकार में थोड़े बहुत बदलाव आए जिससे हम जान सकते हैं के वह पृथ्वी के किस भाग का है। आज का युग तकनीकी एवं अविष्कार का युग है। जितनी खोज होती जा रही है खोज एवं अविष्कार में चुनौती बढ़ती जा रही है। जिसके आगे रंग रूप भेद कम पड़ जाते हैँ। How to find peace!